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विनोबा भावे के उद्धरण

विचार का प्रकाशन वाणी से हो सकता है, लेकिन वाणी से भी गहरी चीज़ है—जीवन और आचरण। उसके ज़रिए भी विचार का प्रकाशन होता है।