Font by Mehr Nastaliq Web

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

वह व्यवस्था या वृत्ति, जिससे लोक मंगल का विधान होता है, ‘अभ्युदय’ की सिद्धि होती है—धर्म है।