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आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

वह वस्तुव्यापार योजना; जो केवल विलक्षणता, नवीनता या अलौकिकता दिखाने के लिए की जाएगी, जिसमें जगत् या जीवन का कोई मार्मिक पक्ष—गंभीर या साधारण; व्यक्त होता न दिखाई पड़ेगा—वह काव्य का ठीक लक्ष्य पूरा न कर सकेगी।