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कुँवर नारायण के उद्धरण

उद्देश्य या सीमित अनुभवों की कविता भी हो सकती है, लेकिन शमशेर का काव्यानुभव उसके प्रतिकूल पड़ता है। वह अर्थ के विस्तार के लिए भाषा में ज़्यादा से ज़्यादा छूट और खुलापन माँगता है।