Font by Mehr Nastaliq Web

गणेश शंकर विद्यार्थी के उद्धरण

उद्देश्य पर दृष्टि रखते हुए, किसी की भृकुटि के तनाव से मत डरो और किसी की मुस्कराहट की भी परवाह मत करो।