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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

तुम यदि सत् बनते हो, तुम्हें देखकर हज़ार-हज़ार लोग सत् हो जाएँगे। और यदि असत् बनते हो; तुम्हारी दुर्दशा में संवेदना प्रकाश करने वाला कोई भी नहीं रहेगा, क्योंकि असत् होकर तुमने अपने चतुर्दिक को असत् बना डाला है।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद