तुम जिस तरह प्रकृत होगे, प्रकृति तुम्हें उस तरह की उपाधि निश्वय देगी एवं तुम्हारे अंदर वैसा अधिकार भी देंगी; इसे नित्य प्रत्यक्ष कर रहे हो, तो तुम्हें और क्या चाहिए? प्राणपण से प्रकृत होने की चेष्टा करो। पढ़कर पास किए बिना क्या युनिवर्सिटी किसी को उपाधि देती है?
अनुवाद :
श्रीरामनंदन प्रसाद