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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

तुम जिस तरह प्रकृत होगे, प्रकृति तुम्हें उस तरह की उपाधि निश्वय देगी एवं तुम्हारे अंदर वैसा अधिकार भी देंगी; इसे नित्य प्रत्यक्ष कर रहे हो, तो तुम्हें और क्या चाहिए? प्राणपण से प्रकृत होने की चेष्टा करो। पढ़कर पास किए बिना क्या युनिवर्सिटी किसी को उपाधि देती है?

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद