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कुँवर नारायण के उद्धरण

तुलसीदास दुरूह होते हुए भी भारतीय आत्मा के सबसे निश्छल छवि है, जिस प्रकार राम की शक्ति पूजा पुरुषार्थ की सबसे उदात्त अभिव्यक्ति।