Font by Mehr Nastaliq Web

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

तुलसी के मानस से रामचरित की जो शील-शक्ति-सौंदर्यमयी स्वच्छ धारा निकली, उसने जीवन की प्रत्येक स्थिति के भीतर पहुँचकर; भगवान् के स्वरूप का प्रतिबिंब झलका दिया।