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गणेश शंकर विद्यार्थी के उद्धरण

तनिक-तनिक सी बातों पर हर्ष से गद्गद हो जाना और अहसानमंदी के दरिया में बह जाना—ओछापन और अज्ञान, निर्बलता और चंचलता है।