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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

यह संसार एक भव्य नैतिक व्यायामशाला है; जहाँ हम सभी को अभ्यास करना चाहिए, ताकि हम आध्यात्मिक रूप से अधिकाधिक सशक्त हो सकें।