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शम्स तबरेज़ी के उद्धरण

सूफ़ी जब किसी को देखता है तो वह अपनी दोनों आँखें बंद करके; तीसरी आँख से उस व्यक्ति को देखता है, ताकि वह उस व्यक्ति के अंदर की सच्चाई को देख सके।

अनुवाद : सरिता शर्मा