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कुँवर नारायण के उद्धरण

सौन्टैग के अनुसार यह धारणा ही कि कला ‘कथ्य ही कथ्य’ है; उसे एक इस्तेमाली सामान में बदल देती है, जो कला की मूल प्रकृति के साथ हिंसा है।