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अवनींद्रनाथ ठाकुर के उद्धरण

शिल्पी चाहे निम्न जाति का ही क्यों न हो पर उसने शिल्प के साथ पाणिग्रहण किया है, इसी कारण शिल्पी सदा शुद्ध और पवित्र होता है—यह बात भारतवर्ष के ऋषि लोग कह गए हैं; किंतु जहाँ पर इस शिल्प का स्पर्श आजकल के हम मशीनी आदमियों ने कर लिया है—वहीं वह मलिन हो गया है।

अनुवाद : रामशंकर द्विवेदी