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अवनींद्रनाथ ठाकुर के उद्धरण

शिल्पचर्चा का प्रारंभिक पाठ होता है शिल्पबोध, जैसे शिशु-शिक्षा का प्राथमिक पाठ होता है बालबोध।

अनुवाद : रामशंकर द्विवेदी