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भर्तृहरि के उद्धरण

शास्त्रोक्त शब्दों से जिनकी वाणी सुंदर है; और शिष्यों के पढ़ाने योग्य जिनकी विद्या है और वे स्वयं भी प्रसिद्ध हैं, ऐसे कवि-विद्वान् जिस राजा के देश में निर्धन रहते हैं, तो यह उस राजा की मुर्खता ही है।