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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

सत्यदर्शी का आश्रय लेकर स्वाधीन भाव से सोचो, एवं विनय सहित स्वाधीन अभिमत प्रकाश करो। पुस्तक पढ़कर पुस्तक मत बन जाओ, उसके सार को मज्जागत करने की चेष्टा करो। Pull the husk to draw the seed (बीज प्राप्त करने के लिए भूसी को अलग करो)।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद