सत्-चालक क्षीण-अहंयुक्त होते हैं; वे स्वयं अपनी क्षमता को तुम्हारे संमुख किसी भी तरह ज़ाहिर न करेंगे, बल्कि इसीलिए तुम्हारे भावानुयाई तुम्हारा अनुसरण करेंगे। और यदि सत्-चालक अवलंबन किए हो, जो भी करो, भय नहीं, मरोगे नहीं, किंतु कष्ट के लिए राजी रहो।
अनुवाद :
श्रीरामनंदन प्रसाद