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गुरु नानक के उद्धरण

सारा आकाश मानो थाल है। सूरज और चाँद उस थाल में दीपक बने हुए हैं। तारों के समूह मानो थाल में मोती रखे हुए हैं। मलय पर्वत से आने वाली हवा, जैसे धूप की सुगंध के समान है। हवा चंवर कर रही है। सारी वनस्पति ज्योति-रूप प्रभु क आरती के लिए फूल दे रही है। जीवों के जन्म-मरण का नाश करने वाले हे प्रभु, कुदरत में कैसी सुंदर तेरी आरती हो रही है, सब जीवों में चल रही एक ही जीवन तरंगें, मानो तेरी आरती के लिए नगाड़े बज रहे हैं।