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राधावल्लभ त्रिपाठी के उद्धरण

संस्कृत के समाज में शास्त्रार्थ की शताब्दियों की परंपरा है; पर उसमें स्त्री की भूमिका पर बात कम हुई है, स्त्री की भूमिका भी कहीं है तो वह उपेक्षित रही है।