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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

संन्यास लेनेवाला राजनीतिक उस साधु की तरह है, जो सुबह से ईश्वर-चिंतन के बहाने भोजन-चिंतन करता है, दोपहर को माल खाकर शाम तक ईश्वर-चिंतन के बहाने नारी-चिंतन करता है, और अँधेरा होने पर किसी भक्तिन के घर में घुस जाता है।