संज्ञानात्मक क्षमता में कमी की पूर्ति, अधिक बुद्धिमानी से हो जाती है। उल्लेखनीय है कि अधिक बुद्धिमानी एक धुंधला गुण है, जिसकी सही परिभाषा भी उपलब्ध नहीं है। यह सच है कि युवाओं में आमतौर पर अधिक बुद्धिमानी और दूरदर्शिता की कमी होती है, जिससे उनका व्यवहार रुख़ा हो जाता है, लेकिन इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि एक निश्चित उम्र के बाद बुद्धिमानी बढ़ने लगती है।