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बाणभट्ट के उद्धरण

समस्त संसार को संतप्त कर देने में समर्थ सूर्य के तेज (की किरणें) त्रिभुवन के नेत्र को आनंदित करने वाले पद्म-समूह में आकर ठंडे पड़ जाते हैं।