Font by Mehr Nastaliq Web

स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

समस्त अज्ञान का आधार यही है कि हम अविनाशी, नित्य शुद्ध पूर्ण आत्मा होते हुए भी सोचते हैं कि हम छोटे-छोटे मन हैं; हम छोटी-छोटी देह मात्र हैं— यही समस्त स्वार्थपरता की जड़ है।