साधारणतः लोग कहते हैं कि वेदांत, दर्शन और धर्म, इस जगत् और उसके सारे सुखों एवं संघर्षों को छोड़कर इसके बाहर जाने का उपदेश देते हैं। पर यह धारणा एकदम ग़लत है। केवल ऐसे अज्ञानी व्यक्ति ही; जो प्राच्य चिंतन के विषय में कुछ नहीं जानते और जिसमें उसकी यथार्थ शिक्षा समझने योग्य बुद्धि ही नहीं है, इस प्रकार की बातें कहते हैं।