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गणेश शंकर विद्यार्थी के उद्धरण

सभ्य संसार के प्रत्येक स्थान में, किसी-न-किसी समय और किसी-न-किसी रूप में स्वतंत्रता की व्यापकता का बोल-बाला अवश्य हुआ।