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कुँवर नारायण के उद्धरण

राम या कृष्ण की दैवी छवि के 'भाव' का; एक परिचित अभिनेता के व्यक्तित्व में विघटित हो जाना उस आदि मिथक-शक्ति का अवमूल्यन है, जिसे कविता आह्वानात्मक ढंग से इस्तेमाल करती है।