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कुँवर नारायण के उद्धरण

वस्तुजगत का यथावत् चित्रण वस्तुजगत का अनुभव हो सकता है, लेकिन कला का अनुभव भी तभी होगा, जब हम उसमें हम किसी प्रकार की रचनात्मक प्रतिभा और प्रेरणा को असंदिग्ध रूप से पहचान सकें।