स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण
पुरोहितों की लिखी हुई पुस्तकों ही में जाति जैसे पागल विचार पाए जाते है, ईश्वर द्वारा प्रकट की हुई पुस्तकों में नहीं।
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