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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

पुरोहितगण चाहे कुछ भी बकें; वर्ण-व्यवस्था केवल एक सामाजिक विधान ही है, जिसका काम हो चुका। अब तो वह भारतीय वायुमंडल में दुर्गंध फैलाने के अतिरिक्त कुछ नहीं करती।