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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

प्रेम, सत्य और निस्वार्थता; मात्र नैतिक अलंकारिक शब्द नहीं हैं, बल्कि ये हमारे सर्वोच्च आदर्श हैं, क्योंकि इनमें शक्ति का ऐसा प्रकटीकरण निहित है।