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उमर ख़य्याम के उद्धरण

प्रेम की मधुशाला में 'मृत्यु' मेरा नाम है। मधुपान व मधु-पूजा मेरी प्रवृत्ति है। मैं मधुशाला के संसार में संसार की आत्मा हूँ। इस संसार की विविध वस्तुएँ मेरी आत्मा के लिए शरीर के समान हैं।