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उमर ख़य्याम के उद्धरण

दूसरे का बुरा चाहने वाला अपने अभीष्ट को प्राप्त नहीं कर सकता। वह एक बुराई नहीं कर जाता है तब तक उसकी सो बुराइयाँ फैल जाती हैं। मैं तेरी भलाई चाहता हूँ, और तू भी मेरी बुराई, तो इसका फल यही होगा कि तुझे भलाई प्राप्त नहीं होगी और मुझे बुराई नहीं पहुँचेगी।