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श्रीमद् राजचंद्र के उद्धरण

प्रत्येक इंद्रिय को अपने-अपने विषय का ज्ञान होता है, लेकिन आत्मा को पाँचों ही इंद्रियों के विषयों का ज्ञान होता है।