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श्यामाचरण दुबे के उद्धरण

प्रतिबद्ध और समर्पित भाव से यदि हम इतिहास की प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करें, तो भविष्य हमारा होगा—अहं और स्वार्थ की टकराहट हमें दिशाहीन अराजकता की ओर ले जाएगी।