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वात्स्यायन के उद्धरण

नायिका के गोद में स्थित बालक को नायक लाड़-प्यार करे, उसे खेलने के लिए खिलौना दे और फिर ले-ले और उसके पास आकर प्रेमिका से बातचीत का क्रम प्रारंभ करे। नायिका से बातचीत करने में समर्थ, अन्य परिजनों से मित्रता जोड़कर उसके द्वारा अपना काम सिद्ध करे। फिर किसी बहाने नायिका के घर आने-जाने का सिलसिला जारी कर दे। जब नायिका समीप में हो, तो नायक अपने मित्र से कामकला संबंधी बातें कहें, जिन्हें नायिका सुन सके।