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वात्स्यायन के उद्धरण

नायिका के घर में ही आने-जाने का मार्ग सुविदित होने पर; आपत्तिकाल में प्रतिकार सोचकर, अनियत काल में (यह राज किसी को मालूम न हो) प्रवेश और निष्क्रमण करना ठीक है। इस प्रकार नायिका के घर में ही नित्य प्रति सरलता से समागम हो सकता है।