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वात्स्यायन के उद्धरण

नायिका अपने दोनों ऊरुओं को बराबर करके; बगल में ले जाकर पार्श्व से सटाकर जानुओं पर रख दे, तो वह 'इंद्राणी' या 'इंद्राणिक' आसन कहलाता है।