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गणेश शंकर विद्यार्थी के उद्धरण

नगर जीवन ग़रीब को अधिकांश रूप से नीचे ही गिराने वाला है। यदि वह बेकार हो जाए, तो वह भिखमंगों की संख्या बढ़ाता है और यदि रोज़गार से लगा रहता है, तो कम-से-कम दुराचार अवश्य बढ़ाता है।