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वेंकी रामकृष्णन के उद्धरण

मौत के बारे में जानना इतना भयानक है कि हम अपने जीवन का ज़्यादातर हिस्सा इससे इनकार करने में ही बिता देते हैं और जब कोई मरता है, तो हमें इसे स्पष्ट रूप से कहने में संकोच होता है; और इसके बजाए हम इसे थोड़ा लाग-लपेट कर कहते हैं, जैसे—"वह चल बसे" या "गुज़र गए", जिससे ऐसा लगता है कि मृत्यु अंतिम नहीं है, बल्कि किसी दूसरी चीज़ में केवल परिवर्तन है।

अनुवाद : अमित कुश