Font by Mehr Nastaliq Web

रवींद्रनाथ टैगोर के उद्धरण

माता ही शिशु को यह बताती है कि यह विशाल विश्व उसका आत्मीय है, नहीं तो माता उसकी अपनी आत्मीय न हो पाती।

अनुवाद : रामशंकर द्विवेदी