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श्याम मनोहर के उद्धरण

मनुष्य की कितनी भी बदहाली हो; श्रेष्ठत्व क्या होता है, इसे वह जानना चाहता है—क्योंकि वह जीवन का गुणधर्म है।

अनुवाद : निशिकांत ठकार