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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

माँ अपने हाथों से बच्चों का यत्न करती है, इसीलिए वहाँ पर अश्रद्धा नहीं आती—इसीसे तो इतना प्यार है।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद