Font by Mehr Nastaliq Web

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

लोकजीवन की धारा जब एक बँधे मार्ग पर कुछ काल तक अबाध गति से चलने पाती है, तभी सभ्यता के किसी रूप का पूर्ण विकास और उसके भीतर सुख-शांति की प्रतिष्ठा होती है।