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विश्वनाथ त्रिपाठी के उद्धरण

कोई अपनी वास्तविक स्थिति निश्छल ढंग से व्यक्त करे; तो उसमें सामाजिकता अपने आप खिंच आएगी, क्योंकि व्यक्ति की स्थिति भी विशिष्ट सामाजिक स्थितियों या संदर्भों का परिमाण है।