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धूमिल के उद्धरण

किसी लेखक की किताब उसके लिए एक ऐसी सुरंग है; जिसका एक सिरा रचना की लहलहाती फूलों भरी घाटी में खुलता है, बशर्ते कि वह (लेखक) उससे (सुरंग के अंधकार से) उबरकर बाहर आ सके।