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आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

किसी कर्म में प्रवृत्त होने से पहले, यह स्वीकार करना आवश्यक होता है कि वह कर्म या तो हमारे लिए या समाज के लिए अच्छा है। इस प्रकार की स्वीकृति कर्म की पहली तैयारी है।