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भामह के उद्धरण

काव्य के स्वादिष्ट रसों में मिश्रित कर शास्त्र का भी उपयोग किया जाता है। पहले मधु का स्वाद लेने वाले कटुभेषज भी पी जाते हैं।

अनुवाद : रामानंद शर्मा