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आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

कविता जिस प्रकार विकसित कमल; रमणी के मुख आदि का सौंदर्य चित्त में अंकित करती है, उसी प्रकार औदार्य, वीरता, त्याग, दया इत्यादि का सौंदर्य भी दिखाती है।