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दुर्गा भागवत के उद्धरण

करुणा से भरा हुआ अर्घ्य, मृत्यु के क्षण में ही मनुष्य को मिलता है। करुणा का यह प्रसाद जिस मनुष्य को नहीं मिलता, उसके जीवन में कुछ ख़ामी रह जाती है।

अनुवाद : वासंतिका पुणतांबेकर